Friday, January 11, 2019

शहर के बीचोंबीच सबसे बड़ा पेन एरिया है स्लाटर हाउस, पार्षदों के अड़ंगे के कारण अटकी शिफ्टिंग

शहर के बीचोंबीच जिंसी में चल रहे स्लाटर हाउस को बंद करके आदमपुर छावनी में शिफ्टिंग को लेकर नगर निगम के पक्ष और विपक्ष के पार्षदों सहित कोई भी गंभीर नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन और एनजीटी के आदेश के बावजूद स्लाटर हाउस की शिफ्टिंग टलती जा रही है।

मंगलवार को नगर निगम परिषद की बैठक में स्लाटर हाउस के टेंडर की मंजूरी के प्रस्ताव पर चर्चा से पहले ही बैठक स्थगित हो गई। परिषद अध्यक्ष सुरजीत सिंह चौहान, महापौर आलोक शर्मा और नेता प्रतिपक्ष मो सगीर सहित किसी भी पार्षद ने इस प्रस्ताव पर चर्चा कराने की कोशिश नहीं की। 22 जनवरी को इस मामले की एनजीटी में पेशी होना है। एनजीटी ने निगम के अधिवक्ता को वर्क ऑर्डर के साथ पेश होने को कहा है, परिषद की मंजूरी के बिना यह संभव नहीं है। ऐसे में एनजीटी सख्त आदेश जारी कर सकती है।

एनजीटी ने 20 मार्च 2015 को स्लाटर हाउस को बंद करके 31 मार्च 2018 तक हर हाल में शहर से बाहर संचालन शुरू करने के निर्देश दिए थे। यह नहीं होने पर एनजीटी ने 2 करोड़ रुपए का एकमुश्त जुर्माना और दस हजार रुपए रोजाना की पेनाल्टी निगम पर लगाई। इस पर निगम ने एनजीटी में पेनाल्टी निरस्त करने का आवेदन दिया है। एनजीटी ने पेनाल्टी स्थगित कर दी है लेकिन प्रोजेक्ट की नियमित मॉनिटरिंग भी कर रही है।
दोबारा बुलाना पड़े टेंडर... इस मामले में निगम को दुबारा टेंडर बुलाना पड़े, क्योंकि पूर्व में चयनित कंपनी 35 एकड़ से कम जमीन पर स्लाटर हाउस बनाने को राजी नहीं थी। इस टेंडर को निरस्त करके नए टेंडर बुलाए गए। 

राज्य शासन दो बार जारी कर चुका है नोटिस :

इस मामले में जमीन के आरक्षण और आवंटन का मुद्दा राज्य शासन से जुड़ा हुआ है। एनजीटी राज्य शासन को भी आड़े हाथों ले चुकी है। 28 फरवरी 2017 को तत्कालीन प्रमुख सचिव (नगरीय प्रशासन) विवेक अग्रवाल ने एनजीटी में एफिडेविट दिया था, जिसमें जमीन आवंटन हो जाने की बात कही गई थी। 3 अगस्त 2017 को जब परिषद में यह प्रस्ताव गिर गया तो 26 अगस्त को राज्य शासन ने महापौर और नगर निगम आयुक्त को नोटिस भेज कर कारण पूछा। इस नोटिस का जवाब समय पर नहीं जाने पर 20 सितंबर को भेजे नोटिस में परिषद के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। इसके बाद 3 अक्टूबर 2017 की परिषद बैठक में आदमपुर छावनी में स्लाटर हाउस बनाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी।

जांच में चूक से वैट का नुकसान
अधिकारियों ने बिल्डरों और ठेकेदारों के खातों, खरीदी, टीडीएस आदि की जांच की, लेकिन इसमें उनसे चूक हुई। चूक के कारण 125 प्रकरणों में टर्नओवर 872.97 करोड़ रुपए कम निर्धारित हुआ। इससे वैट 226.13 करोड़ रुपए कम लगा। ठेकेदारों और उप ठेकेदारों के बीच टीडीएस संबंधी गफलत के कारण 171.82 करोड़ रुपए के टर्नओवर की जानकारी सम्मिलित नहीं की जा सकी, जिससे टैक्स 20.6 करोड़ रुपए कम लगाया गया।

सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वालों को छोड़ेंगे नहीं

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि विधानसभा के पटल पर रखी गयी भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ( कैग ) की रिपोर्ट में जिस तरह से पिछली सरकार के कार्यकाल में वित्तीय अनियमित्ताओं व वित्तीय प्रबंधन की कमज़ोरियां उजागर हुई हैं। करोड़ों रुपये के नुक़सान की बात सामने आई है। उससे यह स्पष्ट हो रहा है कि किस तरह का एक गठजोड़ पिछली सरकार में कार्य कर रहा था। भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहा था। हम सारे मामलों की विस्तृत जांच करवाएंगे। सरकारी ख़ज़ाने को नुक़सान पहुंचाने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा।

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