Sunday, January 6, 2019

भारत ने ऑस्ट्रेलिया में पहली बार जीती टेस्ट सिरीज़

भारतीय क्रिकेट टीम ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया में किसी टेस्ट सिरीज़ में जीत हासिल की है. सिडनी टेस्ट के पांचवें दिन बारिश के चलते मैच को समय से पहले ड्रॉ घोषित किए जाने के साथ ही भारत ने चार टेस्ट मैचों की मौजूदा सिरीज़ को 2-1 से जीत लिया है.

इस जीत के साथ ही भारतीय क्रिकेट टीम ने गावस्कर-बॉर्डर ट्रॉफ़ी पर कब्ज़ा जमा लिया है.

चेतेश्वर पुजारा को मैन ऑफ़ द सिरीज़ चुना गया. उन्होंने सिरीज़ में 74 की औसत से 521 रन बनाए और इस सिरीज़ में पुजारा ने तीन शतक जमाए.

सिरीज़ के चारों टेस्ट मैच का हाल
एडिलेड टेस्ट: भारत - 250 रन (पहली पारी), 307 रन ( दूसरी पारी), ऑस्ट्रेलिया- 235 रन (पहली पारी), 291 रन (दूसरी पारी)

नतीजा- भारत 31 रन से जीता

मैन ऑफ़ द मैच- चेतेश्वर पुजारा

पर्थ टेस्ट: ऑस्ट्रेलिया- 326 रन ( पहली पारी), 243 रन ( दूसरी पारी) भारत- 283 रन (पहली पारी) 140 रन (दूसरी पारी)

पंजाब विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर के पद से अपने करियर की शुरुआत करने वाले मनमोहन सिंह ने कैंब्रिज में भारत के निर्यात और आयात पर अपना शोध किया था. कैंब्रिज से वापस आने पर उन्हें विदेश व्यापार विभाग में बतौर सलाहकार रखा गया था.

मनमोहन सिंह की बेटी दमन सिंह उनकी जीवनी 'स्ट्रिक्टली पर्सनल-मनमोहन एंड गुरशरन' में लिखती हैं, "मेरे पिता अपनी नम्रता को त्याग कर खुलेआम कहा करते थे कि उस समय विदेशी व्यापार के मुद्दों पर भारत में उनसे अधिक जानने वाला कोई नहीं था. उस समय उनके मंत्री थे ललित नारायण मिश्र."

"एक बार वो मनमोहन सिंह से नाराज़ हो गए, क्योंकि वो कैबिनेट को भेजे जाने वाले एक नोट से सहमत नहीं थे. मनमोहन सिंह ने कहा कि वो दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकॉनॉमिक्स में प्रोफ़ेसर की अपनी नौकरी पर वापस चले जाएंगे."

"प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सचिव पीएन हक्सर को इसकी भनक लग गई. उन्होंने कहा कि तुम वापस नहीं जाओगे. उन्होंने उन्हें वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार का पद 'ऑफ़र' कर दिया. इस तरह मंत्री से लड़ाई उनके लिए प्रमोशन लेकर आई."

मनमोहन सिंह ने इसके बाद योजना आयोग के सदस्य और उपाध्यक्ष, रिज़र्व बैंक के गवर्नर और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के प्रमुख के तौर पर काम किया. साल 1991 में नरसिम्हा राव ने उन्हें भारत का वित्त मंत्री बनाया.

नरसिम्हा राव के जीवनीकार विनय सीतापति बताते हैं, "नरसिम्हा राव के पास विचारों की कमी नहीं थी. उनको एक चेहरा या मुखौटा चाहिए था, जो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और उनके घरेलू विरोधियों की भावनाओं पर मरहम लगा सके. साल 1991 में पीसी एलेक्ज़ेंडर उनके सबसे बड़े सलाहकार थे."

"नरसिम्हा राव ने पीसी एलेक्ज़ेंडर से कहा कि मैं एक ऐसे शख़्स को वित्त मंत्री के रूप में चाहता हूं, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत धाक हो. एलेक्ज़ेंडर ने उन्हें आईजी पटेल का नाम सुझाया जो एक समय में रिज़र्व बैंक के गवर्नर रह चुके थे और उस समय लंदन स्कूल ऑफ़ इकॉनॉमिक्स के डायरेक्टर थे."

"पटेल ने राव की पेशकश को स्वीकार नहीं किया क्योंकि वो उस समय दिल्ली में रहने के लिए तैयार नहीं थे. फिर पीसी एलेक्ज़ेंडर ने मनमोहन सिंह का नाम लिया. शपथ ग्रहण समारोह से एक दिन पहले 20 जून को एलेक्ज़ेंडर ने मनमोहन सिंह को फ़ोन किया."

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