Tuesday, December 11, 2018

छत्तीसगढ़ में योगी का आशीर्वाद क्यों हुआ निष्फल?

छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी का चुनाव प्रचार थोड़ा अलग था. वहाँ बीजेपी खेमे के प्रचार की अगुआई प्रधानमंत्री मोदी नहीं बल्कि योगी आदित्यनाथ के कंधों पर थी.

12 और 20 नवंबर को चुनाव हुए, और सात दिसंबर को जैसे ही देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव पूरे हुए, टीवी चैनलों पर अलग-अलग एग्ज़िट पोल दिखाए जाने लगे.

अपने-अपने दावों के तहत इन एग्ज़िट पोल ने कांग्रेस को राजस्थान में आसान जीत और मध्यप्रदेश में बढ़त पाने के संकेत दिखाए गए.

इस बीच ये एग्ज़िट पोल महज़ एक राज्य की तस्वीर साफ नहीं कर पाए. यह राज्य था छत्तीसगढ़.

कुछ ने बताया कि यहां रमन सिंह के नेतृत्व में बीजेपी चौथी बार सरकार बनाएगी वहीं कुछ ने कांग्रेस की जीत का दावा किया.

हालंकि, एग्जिट पोल की चर्चाओं के बाद मंगलवार को जब मतपेटियां खुलने लगीं और उसके बाद ईवीएम में पड़े वोटों की गिनती शुरू हुई तो सबसे पहले जिस राज्य की तस्वीर साफ हुई वह छत्तीसगढ़ ही था.

छत्तीसगढ़ में विधानसभा की कुल 90 सीटें हैं. रुझानों के मुताबिक कांग्रेस 60 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. वहीं बीजेपी के खाते में बमुश्किल 19 सीटें आ रही हैं. मुख्यमंत्री रमन सिंह ने हार की ज़िम्मेदारी स्वीकार भी कर ली है.

इसके अलावा अजीत जोगी और मायावती के गठबंधन को 8 सीटें मिलती हुई दिख रही हैं.

किसानों की नाराज़गी?

छत्तीसगढ़ के चुनावी नतीजे देखने के बाद लगता है कि जैसे यहां बीजेपी ने कोई चुनावी रणनीति ही नहीं बनाई थी.

अगर हम वोट प्रतिशत पर नज़र डालें तो स्थिति और साफ हो जाती है. यहां कांग्रेस को जहां 43 प्रतिशत से अधिक वोट मिले हैं वहीं बीजेपी के पाले में करीब 33 प्रतिशत वोट ही पड़े हैं.

वोट प्रतिशत में 10 फीसदी का फ़ासला दिखाता है कि यहां बीजेपी को कितनी बुरी हार का सामना करना पड़ा है.

ऐसे में सवाल उठता है कि इसकी सबसे बड़ी वजह क्या है.

छत्तीसगढ़ में काम करने वाले वरिष्ठ पत्रकार अजय भान सिंह इसके पीछे बीजेपी की हल्की रणनीति को प्रमुख वजह बताते हैं.

अजय कहते हैं, ''बीजेपी की हार के पीछे बड़ी वजह किसानों की नाराजगी है. कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में किसानों की कर्ज़माफी का ज़िक्र किया था साथ ही ज़मीनीस्तर पर वह संदेश देने में कामयाब रही थी कि अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो किसानों की बदहाल स्थिति में सुधार आएगा.''

''कर्ज़माफी की बात जानने के बाद किसानों के वोटबैंक में बड़ा फर्क देखने को मिला और वे बीजेपी की जगह कांग्रेस की तरफ झुक गए, वैसे भी देश भर में इस साल कई बार किसानों ने केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला, इस तरह बीजेपी की किसान विरोधी छवि अपने-आप ही बनने लगी थी.''

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